बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर: छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर मैदानी इलाकों में भारी तबाही, उफान पर नदी-नाले; कई जिलों का संपर्क टूटा, स्कूल बंद और अलर्ट जारी
अर्नब' का असर छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश से बस्तर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। जगदलपुर में हाईवे बंद, गंगरेल के 10 गेट खुले और बालोद में स्कूल बंद।
रायपुर: बंगाल की खाड़ी से उठे भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' ने छत्तीसगढ़ के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। तूफान के प्रभाव से बस्तर संभाग समेत राज्य के मैदानी इलाकों में पिछले तीन दिनों से मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। निरंतर हो रही इस बारिश के कारण प्रदेश के नदी, नाले और प्रमुख जलाशय उफान पर हैं। बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में SDRF और नगर निगम की आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात किया गया है।
तबाही और जलभराव की स्थिति का जिलावार विवरण:
1. बस्तर संभाग और जगदलपुर: जलमग्न हुए मार्ग, बीजापुर-सुकमा से संपर्क कटा
जगदलपुर शहर और आसपास के इलाकों में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस चुका है।
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अवरुद्ध राष्ट्रीय राजमार्ग: डिमरापाल के पास नेशनल हाईवे पर लबालब पानी भर जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। जगदलपुर को बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर भी आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है।
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इंद्रावती का बढ़ता जलस्तर: ओडिशा स्थित खाटीगुडा डैम के गेट खोले जाने और वहां से लगभग 5 लाख घन मीटर पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में अलर्ट जारी कर निगरानी बढ़ा दी है।
2. धमतरी: गंगरेल बांध के 10 गेट खोले गए, महानदी के तटीय गांवों में अलर्ट
धमतरी जिले में हो रही लगातार बारिश से सभी प्रमुख जलाशय अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुंच चुके हैं।
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गंगरेल और अन्य बांधों का हाल: राज्य का प्रमुख गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध 98% से अधिक भर चुका है, जिसके चलते उसके 14 में से 10 गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है। रुद्री बैराज से महानदी में लगभग 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
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अन्य जलाशय: मुरुमसिल्ली बांध 100% फुल हो चुका है, जबकि दुधावा और सोंढुर बांधों में भी जलभराव 90% के पार चला गया है।
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हटकुल नदी के उफान पर होने से धमतरी के आसपास के कई ग्रामीण अंचलों का संपर्क टूट गया है।
3. कांकेर: दूध नदी विकराल रूप में, 70 से अधिक गांव अलग-थलग
कांकेर में दूध नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
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आमाबेड़ा-धनोरा मार्ग और कांकेर-आमाबेड़ा मार्ग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।
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उफनते नदी-नालों के कारण आमाबेड़ा क्षेत्र के 70 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
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हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने उफनते नालों के पास बैरिकेड्स लगा दिए हैं और नागरिकों से जान जोखिम में न डालने की अपील की है।
4. बालोद: आज स्कूलों में छुट्टी, 25 सितंबर की परीक्षा टली
बारिश और जलभराव के गंभीर हालात को देखते हुए बालोद कलेक्टर ने 25 सितंबर को जिले के सभी शासकीय, अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है।
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25 सितंबर को होने वाली परीक्षाएं अब 28 सितंबर को पूर्व निर्धारित समय पर आयोजित की जाएंगी।
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बालोद शहर की जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। इसके अलावा, गणेश उत्सव के समापन अवसर पर होने वाले हवन और विसर्जन कार्यक्रमों पर भी इस बारिश का सीधा असर पड़ता दिख रहा है।

5. दुर्ग-भिलाई: सुपेला और दक्षिण गंगोत्री अंडरब्रिज डूबे
मैदानी इलाकों में भी मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरसी है। दुर्ग-भिलाई के प्रमुख आवागमन मार्ग—सुपेला और दक्षिण गंगोत्री के दोनों अंडरब्रिज पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के कर्मचारियों और आम नागरिकों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
प्रशासन की अपील: राज्य शासन और संबंधित जिला प्रशासनों ने उफान पर चल रहे नदी-नालों के पास न जाने, जलभराव वाले निचले क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और केवल अति-आवश्यक होने पर ही यात्रा करने की हिदायत दी है। संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव दल लगातार गश्त कर रहे हैं।
संपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज