अमेरिकी फेडरल रिजर्व में भारतीय दिग्गजों का दबदबा: रघुराम राजन समेत तीन विशेषज्ञों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने रघुराम राजन, राज चेट्टी और आशा शर्मा को अपनी प्रमुख टास्क फोर्स में शामिल किया है। जानिए क्या होगी इनकी जिम्मेदारी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा।
वॉशिंगटन डीसी | 16 जुलाई, 2026 दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक, 'अमेरिकी फेडरल रिजर्व' ने अपनी मौद्रिक नीतियों, डेटा प्रणालियों और बैलेंस शीट रणनीति की व्यापक समीक्षा के लिए एक महत्वाकांक्षी सुधार प्रक्रिया शुरू की है। इस महत्वपूर्ण सुधार अभियान में भारतीय मूल के तीन दिग्गजों—रघुराम राजन, राज चेट्टी और आशा शर्मा—को प्रमुख टास्क फोर्स में शामिल किया गया है।
फेडरल रिजर्व की नई टास्क फोर्स में महत्वपूर्ण नियुक्तियाँ
फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनलों में इन तीन भारतीयों को उनकी विशेषज्ञता के आधार पर महत्वपूर्ण भूमिकाएँ सौंपी गई हैं:
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रघुराम राजन (पूर्व RBI गवर्नर): उन्हें 'बैलेंस शीट पॉलिसी टास्क फोर्स' में नियुक्त किया गया है। यह पैनल फेडरल रिजर्व की विशाल बैलेंस शीट और उसकी वर्तमान संपत्तियों की प्रभावकारिता की गहन जाँच करेगा।

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राज चेट्टी (हार्वर्ड अर्थशास्त्री): चेट्टी 'डेटा टास्क फोर्स' का सह-नेतृत्व करेंगे। यह समिति नीतिगत निर्णयों को बेहतर बनाने के लिए डेटा की गुणवत्ता और विश्लेषण के आधुनिक तरीकों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

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आशा शर्मा (माइक्रोसॉफ्ट एक्जीक्यूटिव): आशा शर्मा 'प्रोडक्टिविटी और जॉब्स टास्क फोर्स' का हिस्सा होंगी। यह पैनल एआई (AI) जैसी उभरती तकनीकों के रोजगार और उत्पादकता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करेगा।

सुधार का व्यापक उद्देश्य
चेयरमैन केविन वॉर्श ने इन टास्क फोर्सेज को "प्रथम सिद्धांतों" (first principles) से शुरू करने और मौजूदा प्रथाओं की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। यह सुधार प्रक्रिया मुख्य रूप से पाँच क्षेत्रों पर केंद्रित है: कम्युनिकेशंस, बैलेंस शीट पॉलिसी, डेटा, उत्पादकता एवं रोजगार, और मुद्रास्फीति फ्रेमवर्क। ये पैनल स्वतंत्र रूप से काम करेंगे और साल के अंत तक फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) को अपनी सिफारिशें सौंपेंगे।
इन पैनलों में इन भारतीय विशेषज्ञों के अलावा मर्विन किंग (पूर्व बैंक ऑफ इंग्लैंड गवर्नर) और नोबेल पुरस्कार विजेता थॉमस सार्जेंट जैसे वैश्विक दिग्गज भी शामिल हैं, जो इस सुधार की गंभीरता को दर्शाता है। वैश्विक आर्थिक नीति निर्माण में भारतीय मूल के विशेषज्ञों की यह सक्रिय भागीदारी न केवल उनकी योग्यता का प्रमाण है, बल्कि भारत के लिए एक बड़े गर्व का विषय भी है।
कंचन यादव
सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़