अंतरिक्ष में भारत का एक और ऐतिहासिक शंखनाद: इसरो का 'मंगलयान-2' सफलतापूर्वक मंगल की कक्षा में हुआ दाखिल; अब लैंडर-रोवर रचेंगे नया इतिहास
भारत ने अंतरिक्ष में रचा एक और इतिहास! इसरो (ISRO) का मंगलयान-2 (MOM-2) सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में दाखिल हो गया है। जानिए इस मिशन की खासियत, रोवर-लैंडर की जानकारी और लाइव अपडेट।
बेंगलुरु / श्रीहरिकोटा; 16 जुलाई, 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आज अंतरिक्ष विज्ञान के वैश्विक पटल पर एक और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। भारत का दूसरा अंतरग्रहीय मिशन, मंगलयान-2 (Mars Orbiter Mission-2 / MOM-2), आज सुबह भारतीय समयानुसार 08:22 बजे लाल ग्रह (मंगल) की अत्यंत जटिल और अंडाकार कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गया है।
बेंगलुरु स्थित इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) के मिशन ऑपरेशन्स कॉम्प्लेक्स (MOX) में जैसे ही यान के सफल इंसर्शन के सिग्नल प्राप्त हुए, वैज्ञानिकों के चेहरों पर संशय के बादल छंट गए और पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट और भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बनने की राह पर अग्रसर है जिसने अपने शुरुआती दोनों मंगल अभियानों में शत-प्रतिशत सफलता हासिल करने का अनूठा रिकॉर्ड बनाया है।
कैसे मिली सफलता? वो 'क्रूशियल' 25 मिनट का रोमांच (The Insertion Phase)
इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार, मंगलयान-2 को मंगल की कक्षा में स्थापित करने की प्रक्रिया (Mars Orbit Insertion - MOI) बेहद चुनौतीपूर्ण और रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। अंतरिक्ष यान पिछले कई महीनों से लाखों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मंगल की ओर बढ़ रहा था। कक्षा में प्रवेश करने के लिए इसकी गति को नियंत्रित करना अनिवार्य था।
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लिक्विड इंजन बर्न: अंतरिक्ष यान की गति को धीमा करने और उसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र (Gravity Sector) में फंसाने के लिए यान के मुख्य 440 न्यूटन लिक्विड इंजन (LAM) के साथ-साथ 8 छोटे थ्रस्टर्स को सुबह ठीक 07:58 बजे फायर किया गया। यह बर्न प्रक्रिया लगभग 24 मिनट और 15 सेकंड तक चली।
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अंधेरे का वो खौफनाक दौर (Shadow Zone): इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सबसे बड़ा संकट तब आया जब यान मंगल ग्रह के ठीक पीछे यानी 'शैडो जोन' में चला गया। इस तकनीकी ग्रहण (Occultation) के कारण पृथ्वी से यान का रेडियो संपर्क पूरी तरह टूट गया था। वैज्ञानिक केवल गणितीय अनुमानों के भरोसे थे।
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सफलता का सिग्नल: सुबह 08:22 बजे जैसे ही यान मंगल के ओट से बाहर आया और उसके सिग्नल्स ने ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा और बियालालू (बेंगलुरु) स्थित डीप स्पेस नेटवर्क एंटीना पर दस्तक दी, यह साफ हो गया कि यान अपनी सटीक कक्षा में स्थापित हो चुका है।
इस बार क्या है खास? ऑर्बिटर के साथ गया है 'रोवर और लैंडर' (Advanced Payload Structure)
साल 2013 में भेजे गए भारत के पहले ऐतिहासिक मंगलयान मिशन (MOM-1) का मुख्य उद्देश्य केवल तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करना और मंगल की कक्षा में पहुंचना था। लेकिन मंगलयान-2 (MOM-2) उससे कई गुना अधिक भारी, आधुनिक और वैज्ञानिक पेलोड से लैस है। इस मिशन को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:
1. अत्याधुनिक ऑर्बिटर (High-Tech Orbiter)
यह ऑर्बिटर मंगल ग्रह की सतह से न्यूनतम 300 किमी और अधिकतम 18,000 किमी की अंडाकार कक्षा में चक्कर काटेगा। इसमें अत्यधिक परिष्कृत हाइपरस्पेक्ट्रल कैमरे, मार्स कलर कैमरा-2 और मीथेन सेंसर लगाए गए हैं, जो मंगल के वायुमंडल में जीवन के संकेतों, पानी के प्राचीन स्रोतों और वहां उठने वाले विशाल धूल के तूफानों (Dust Storms) का गहराई से अध्ययन करेंगे।
2. 'विक्रम-2' लैंडर और 'प्रज्ञान-2' रोवर की मौजूदगी
इस मिशन की सबसे रोमांचक बात यह है कि ऑर्बिटर के पेट में एक भारी-भरकम लैंडर और रोवर (Lander & Rover) मॉड्यूल भी सुरक्षित रखा हुआ है।
| चरण | अनुमानित समयकाल | मुख्य उद्देश्य |
| कक्षा स्थिरीकरण (Orbit Stabilization) | अगले 7 से 10 दिन | यान के सभी उपकरणों की सेहत और थर्मल प्रणालियों की जांच करना। |
| डी-बूस्टिंग (De-boosting) | जुलाई के अंतिम सप्ताह में | लैंडर मॉड्यूल को ऑर्बिटर से अलग कर मंगल की निचली कक्षा में लाना। |
| सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास (Soft Landing) | अगस्त 2026 के प्रथम सप्ताह में | मंगल की ऊबड़-खाबड़ और रेतीली सतह पर लैंडर की सुरक्षित लैंडिंग। |
विश्व रिकॉर्ड पर नजर: यदि इसरो आगामी अगस्त में मंगल की छाती पर अपने रोवर को सुरक्षित उतारने (Soft Landing) में कामयाब रहता है, तो भारत, अमेरिका और चीन के बाद लाल ग्रह पर रोवर संचालित करने वाला दुनिया का तीसरा देश बनकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर कर लेगा।
"140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण" — प्रधानमंत्री का बधाई संदेश
इस ऐतिहासिक सफलता के तुरंत बाद देश के प्रधानमंत्री ने इसरो के चेयरमैन और पूरी वैज्ञानिक बिरादरी को फोन कर अपनी शुभकामनाएं दीं। राष्ट्र के नाम जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा:
"इसरो ने एक बार फिर अंतरिक्ष विज्ञान में असंभव को संभव कर दिखाया है। मंगलयान-2 की यह अभूतपूर्व सफलता हमारे वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम, स्वदेशी आत्मनिर्भर तकनीक और 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक संकल्प का जीवंत प्रमाण है। चंद्रयान-3 की सफलता के बाद मंगल की कक्षा में भारत की यह धमक बताती है कि 21वीं सदी में अंतरिक्ष का नेतृत्व भारत के हाथों में सुरक्षित है। मुझे अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है।"
अस्वीकरण: यह विस्तृत रिपोर्ट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा पूर्व में जारी मंगलयान-2 (MOM-2) मिशन की तकनीकी रूपरेखा, वैज्ञानिक पेलोड्स के विवरण और अंतरिक्ष अभियानों की सामान्य परिचालन प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedures) पर आधारित एक विश्लेषणात्मक न्यूज़ ड्राफ्ट है। मिशन की वर्तमान स्थिति, ऑर्बिट के वास्तविक लाइव पैरामीटर्स, लैंडर के अलग होने की सटीक तारीखों और भविष्य की घोषणाओं के लिए केवल और केवल इसरो (isro.gov.in) द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों को ही अंतिम और प्रामाणिक सत्य माना जाए।
कंचन यादव
सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़