चूहे द्वारा कार के तार कुतरने पर इंश्योरेंस क्लेम खारिज करना पड़ा भारी: मध्य प्रदेश उपभोक्ता फोरम का ऐतिहासिक फैसला, कंपनी पर लगा जुर्माना

मध्य प्रदेश उपभोक्ता फोरम का ऐतिहासिक फैसला। चूहे द्वारा कार के तार कुतरने पर इंश्योरेंस कंपनी ने खारिज किया था क्लेम। कोर्ट ने कंपनी की दलीलें ठुकराकर लगाया जुर्माना और दिया कार मालिक को मुआवजा देने का आदेश। पढ़ें पूरी खबर।

चूहे द्वारा कार के तार कुतरने पर इंश्योरेंस क्लेम खारिज करना पड़ा भारी: मध्य प्रदेश उपभोक्ता फोरम का ऐतिहासिक फैसला, कंपनी पर लगा जुर्माना

भोपाल: मध्य प्रदेश के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम (कंज्यूमर फोरम) ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाते हुए एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चूहों या किसी अन्य जीव द्वारा वाहन को पहुंचाया गया नुकसान पूरी तरह से 'बाहरी प्रभाव' (External Influence) की श्रेणी में आता है, और इसके लिए बीमा कंपनियां क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकतीं।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला मध्य प्रदेश के एक कार मालिक से जुड़ा है, जिन्होंने हाल ही में एक नई गाड़ी खरीदी थी। कार खड़ी रहने के दौरान चूहों ने उसके इंजन कंपार्टमेंट में घुसकर मुख्य वायरिंग और तारों को बुरी तरह कुतर दिया, जिससे गाड़ी बंद हो गई। जब कार मालिक ने अधिकृत सर्विस सेंटर से मरम्मत का अनुमानित खर्च लेकर अपनी इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम फाइल किया, तो कंपनी ने उसे सिरे से खारिज कर दिया।

बीमा कंपनी ने दलील दी कि पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार, चूहों द्वारा किया गया नुकसान किसी सड़क दुर्घटना या 'बाहरी प्रभाव' की परिभाषा में नहीं आता है। कंपनी का कहना था कि यह गाड़ी के रखरखाव (Maintenance) से जुड़ा मामला है, इसलिए वे इसका हर्जाना नहीं देंगे।

कंज्यूमर फोरम की तल्ख टिप्पणी और फैसला

बीमा कंपनी के इस रवैये से परेशान होकर कार मालिक ने न्याय के लिए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की गहन सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने इंश्योरेंस कंपनी की दलीलों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • नियंत्रण से बाहर का कारक: कोर्ट ने कहा कि चूहा कोई पालतू जीव नहीं है और न ही वह कार मालिक की मर्जी से गाड़ी में घुसता है। किसी भी स्थान पर चूहों का गाड़ी के भीतर प्रवेश करना पूरी तरह से कार मालिक के नियंत्रण (Control) से बाहर की बात है।

  • चूहा एक 'बाहरी कारक' है: अदालत ने बीमा कंपनी की परिभाषा को बदलते हुए साफ किया कि चूहा एक बाहरी तत्व (External Agent) है। यदि वह बाहर से आकर गाड़ी के आंतरिक हिस्सों को नुकसान पहुंचाता है, तो इसे 'बाहरी प्रभाव से हुआ नुकसान' ही माना जाएगा।

  • सेवा में कमी: पॉलिसी सक्रिय होने के बावजूद जायज क्लेम को रोकना बीमा कंपनी की सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) को दर्शाता है।

कोर्ट का सख्त आदेश और जुर्माना

उपभोक्ता अदालत ने न केवल कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया, बल्कि इंश्योरेंस कंपनी की हठधर्मिता पर कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया:

  1. मरम्मत का पूरा खर्च: कंपनी कार की वायरिंग और इंजन की मरम्मत में लगा शत-प्रतिशत वैध खर्च तुरंत उपभोक्ता को भुगतान करे।

  2. मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा: नई कार के खराब होने और क्लेम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने के कारण उपभोक्ता को हुई मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के एवज में कोर्ट ने कंपनी पर जुर्माना लगाया है, जो मुआवजे के रूप में पीड़ित को दिया जाएगा।

  3. मुकदमे का खर्च: कानूनी लड़ाई में उपभोक्ता द्वारा खर्च की गई अदालती राशि (Litigation Cost) का भुगतान भी कंपनी को ही करना होगा।

कार मालिकों के लिए क्यों बड़ा है यह फैसला?

आमतौर पर बीमा कंपनियां पॉलिसी के बारीक अक्षरों (Fine Print) का हवाला देकर चूहों द्वारा काटे गए तारों, प्लास्टिक पार्ट्स या सीट के नुकसान पर क्लेम देने से मना कर देती हैं। मध्य प्रदेश उपभोक्ता फोरम का यह फैसला देश भर के लाखों कार मालिकों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा। अब इस फैसले के आधार पर कोई भी वाहन स्वामी चूहों द्वारा किए गए नुकसान पर इंश्योरेंस कंपनी से अपने हक का क्लेम कानूनी तौर पर वसूल सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह समाचार रिपोर्ट उपभोक्ता अदालतों द्वारा पूर्व में दिए गए विभिन्न निर्णयों और कानूनी सिद्धांतों के सामान्य संकलन पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट मामले की कानूनी स्थिति, पॉलिसी के प्रकार (जैसे- कॉम्प्रीहेंसिव या ज़ीरो डेप्रिसिएशन ऐड-ऑन) और बीमा कंपनी के विशिष्ट नियमों व शर्तों पर निर्भर करती है। पाठक अपने वाहन के इंश्योरेंस क्लेम से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय के लिए अपनी पॉलिसी गाइडबुक पढ़ें अथवा किसी कानूनी विशेषज्ञ या बीमा सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

नारद एक्सप्रेस न्यूज़/सम्पादक

हेमंत