RSS की 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' संपन्न: शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार और 'पंच परिवर्तन' का संकल्प
"समालखा में संपन्न हुई RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा। शताब्दी वर्ष में संगठन विस्तार, 88,949 शाखाओं का लक्ष्य और 'पंच परिवर्तन' पर बनी महत्वपूर्ण कार्ययोजना। पढ़ें पूरी अपडेट।"
समालखा (हरियाणा) | 15 मार्च 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली इकाई, 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की तीन दिवसीय बैठक आज हरियाणा के समालखा स्थित 'माधव सृष्टि' परिसर में विधिवत संपन्न हो गई। संगठन के शताब्दी वर्ष (Centenary Year) के दौरान आयोजित यह बैठक ऐतिहासिक रही, जिसमें संघ ने न केवल अपने सांगठनिक विस्तार के चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार के लिए अपनी भविष्य की दिशा भी तय की।
संगठन का अभूतपूर्व विस्तार
बैठक में प्रस्तुत वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में संघ के कार्यों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। संघ के सह-सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंदा ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में संघ की कुल 88,949 शाखाएं सक्रिय हैं, जो देश के 55,683 स्थानों पर आयोजित की जा रही हैं। पिछले एक साल में ही 5,820 नई शाखाएं शुरू हुई हैं और 3,943 नए स्थानों तक संघ की पहुंच बनी है। यह विस्तार संघ की बढ़ती स्वीकार्यता और 'डिजिटल जॉइनिंग' (Join RSS) पहल की सफलता को दर्शाता है।
'गृह संपर्क' अभियान: समाज के हर वर्ग तक पहुंच
शताब्दी वर्ष के मुख्य कार्यक्रमों में से एक, 'गृह संपर्क अभियान' पर बैठक में विशेष चर्चा हुई। स्वयंसेवकों ने अब तक देश के 10 करोड़ से अधिक परिवारों और लगभग 3,90,000 गांवों तक व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया है। केरल जैसे राज्यों में संघ की सक्रियता चर्चा का विषय रही, जहाँ स्वयंसेवकों ने 55,000 से अधिक मुस्लिम और 54,000 से अधिक ईसाई परिवारों के साथ संवाद स्थापित किया। संघ ने इसे सामाजिक सद्भाव की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
'पंच परिवर्तन' का रोडमैप
बैठक का मुख्य केंद्र संघ की 'पंच परिवर्तन' (Five Transformations) नीति रही, जो आगामी वर्षों में संगठन के कार्य का आधार होगी। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित पांच बिंदुओं पर बल दिया गया है:
- सामाजिक सद्भाव: जातिगत भेदभाव को मिटाकर समरस समाज का निर्माण।
- परिवार प्रबोधन: भारतीय पारिवारिक मूल्यों को संरक्षित करना।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी।
- स्वदेशी: स्वदेशी वस्तुओं, विचारों और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन।
- नागरिक कर्तव्य: संविधान के प्रति सम्मान और नागरिक कर्तव्यों का पालन।
सामयिक विषयों पर स्पष्ट रुख
बैठक के दौरान संघ नेतृत्व ने देश और दुनिया से जुड़े समसामयिक विषयों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया:
- पश्चिम एशिया संघर्ष: संघ ने विश्व में शांति का आह्वान किया। सरकार्यवाह ने कहा कि इस मामले में भारत सरकार जो भी नीति अपनाएगी, संघ उसका समर्थन करेगा, क्योंकि देश का हित सर्वोपरि है।
- बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति: संघ ने बांग्लादेश सरकार से वहां के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति के सामान्य होने और मणिपुर में शांति बहाली के प्रयासों को संघ ने सकारात्मक बताया।
बैठक का समापन और भविष्य की दिशा
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के मार्गदर्शन में हुई इस सभा में 1,489 प्रतिनिधियों और 32 सहयोगी संगठनों के प्रमुखों ने भाग लिया। बैठक के अंतिम दिन आगामी वर्ष के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों (संघ शिक्षा वर्ग) और सांगठनिक कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अपने दूसरे शतक में प्रवेश कर रहा संघ, अब केवल एक संगठन से बढ़कर 'सामाजिक चेतना' का बड़ा माध्यम बनने की ओर अग्रसर है।
कंचन यादव
सह संपादक / नारद एक्सप्रेस न्यूज़