आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का महामंथन: शताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और सांगठनिक विस्तार पर केंद्रित बैठक शुरू

हरियाणा के समालखा में आरएसएस की तीन दिवसीय 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' शुरू हो गई है। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस बैठक में संगठन के विस्तार, 'पंच परिवर्तन' अभियान और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा हो रही है। इस बैठक में 1,400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हैं, जो संघ की भविष्य की कार्ययोजना तय करेंगे।

आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का महामंथन: शताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और सांगठनिक विस्तार पर केंद्रित बैठक शुरू

समालखा, हरियाणा | 13 मार्च 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च इकाई, 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक आज हरियाणा के समालखा में भव्य रूप से आरंभ हो गई। संघ के लिए यह वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके 'शताब्दी वर्ष' (स्थापना के 100 वर्ष) का पड़ाव है। इस बैठक में देशभर से आए 1,400 से अधिक प्रतिनिधि संघ की भविष्य की कार्ययोजना और वैचारिक विस्तार की रणनीतियों पर गहन मंथन कर रहे हैं।

बैठक का मुख्य एजेंडा: शताब्दी वर्ष की दृष्टि संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की उपस्थिति में शुरू हुई इस बैठक में सबसे बड़ा फोकस अगले एक साल की कार्ययोजना पर है।

  • पंच परिवर्तन का संकल्प: संघ ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए 'पंच परिवर्तन' का रोडमैप तैयार किया है। इसमें सामाजिक सद्भाव, परिवार प्रबोधन (पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करना), पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का आग्रह और नागरिक कर्तव्यों का पालन शामिल है। इन पांच बिंदुओं को धरातल पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं को व्यापक दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
  • सांगठनिक पुनर्गठन: संगठन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सांगठनिक ढांचे में बदलाव की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, संघ अब 'प्रांत' व्यवस्था की जगह 'संभाग' प्रणाली पर अधिक जोर दे रहा है ताकि (ग्रासरूट) स्तर तक शाखाओं का विस्तार हो सके और कार्य की पहुंच बढ़े।

 वैश्विक चिंताओं पर संघ की मुखर राय इस बार की प्रतिनिधि सभा में केवल राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी संघ ने अपनी स्पष्ट राय रखी है:

  1. बांग्लादेश की स्थिति: संघ ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के प्रति हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रतिनिधि सभा में इस विषय पर एक विशेष प्रस्ताव पर चर्चा की जा रही है, जिसमें भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक दबाव बनाने और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
  2. विश्व युद्ध का बढ़ता खतरा: वर्तमान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर संघ ने चिंता जाहिर की है। संघ ने कहा है कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और मानवता के हित में विश्व समुदाय को तुरंत शांति स्थापित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।

प्रमुख आकर्षण: संत रविदास जयंती समारोह अगले वर्ष आने वाली संत रविदास जी की 650वीं जयंती को व्यापक स्तर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। संघ इसे सामाजिक समरसता के एक बड़े अवसर के रूप में देख रहा है। इस संबंध में देशभर में वर्ष भर चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य संत रविदास के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।

 बैठक का महत्व

  • भागीदारी: इस बैठक में संघ से प्रेरित 32 विभिन्न अनुषांगिक संगठनों (जैसे भाजपा, एबीवीपी, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय किसान संघ आदि) के शीर्ष पदाधिकारी शामिल हैं।
  • रणनीति: यह बैठक आगामी समय के लिए संघ की विचारधारा और सामाजिक एजेंडे की दिशा तय करेगी।

15 मार्च को बैठक के समापन पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों और प्रस्तावों की आधिकारिक जानकारी साझा करेंगे। राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर इस बात पर टिकी है कि संघ का यह 'शताब्दी विजन' आगामी वर्षों में भारतीय समाज और राजनीति पर क्या प्रभाव डालेगा।

 

कंचन यादव

सह संपादक / नारद एक्सप्रेस न्यूज़