छत्तीसगढ़ की श्वेता बावनकर ने जीता 'मिसेज इंडिया यूनिवर्स' का खिताब; इंदौर में रचा इतिहास
छत्तीसगढ़ की श्वेता अविनाश बावनकर ने इंदौर में आयोजित 'मिसेज इंडिया यूनिवर्स' का खिताब अपने नाम किया है। पेशे से शिक्षिका और फैशन एंटरप्रेन्योर श्वेता ने 50 से अधिक प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की। जानिए उनके संघर्ष और प्रेरणादायक सफर की पूरी कहानी।
रायपुर/इंदौर। इंदौर के प्रतिष्ठित जार्डिन होटल में आयोजित राष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता 'मिसेज इंडिया यूनिवर्स' में छत्तीसगढ़ की श्वेता अविनाश बावनकर ने अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और सौंदर्य का परचम लहराते हुए मुख्य विजेता का खिताब अपने नाम कर लिया है। देशभर के विभिन्न राज्यों से आई 50 से अधिक फाइनलिस्ट्स को पीछे छोड़ते हुए श्वेता ने यह गौरव हासिल कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है।

बॉलीवुड अभिनेत्री दीपशिखा नागपाल रहीं मुख्य अतिथि
'VMS ऑर्गनाइजर्स' के जितेंद्र सिंह एवं कविता सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस भव्य समारोह में बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्री दीपशिखा नागपाल बतौर सेलिब्रिटी गेस्ट उपस्थित रहीं।
प्रतिस्पर्धा के दौरान श्वेता की ग्रेसफुल एवं प्रोफेशनल रैंप वॉक ने जजों का विशेष ध्यान खींचा। इसके बाद टैलेंट राउंड में उनके शानदार डांस परफॉर्मेंस ने निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शिक्षिका से फैशन एंटरप्रेन्योर तक का सफर
पेशे से शिक्षिका श्वेता कोरियोग्राफी और मॉडलिंग में गहरी रुचि रखती हैं। इसके साथ ही वे परिधान (गार्मेंट्स) और ज्वेलरी व्यवसाय से भी जुड़ी एक सफल उद्यमी (एंटरप्रेन्योर) हैं। फैशन और स्टाइलिंग की इसी व्यावहारिक समझ का प्रभाव उनके कैटवॉक और प्रेजेंटेशन में स्पष्ट दिखाई दिया। उल्लेखनीय है कि सौंदर्य प्रतिस्पर्धाओं में यह श्वेता की हैट्रिक (तीसरा राष्ट्रीय खिताब) है।

विशेष बच्चे की मुस्कान और कजिन बनीं प्रेरणा
अपनी इस उपलब्धि के पीछे की प्रेरणा का जिक्र करते हुए श्वेता ने बताया कि अमेरिका में 'मिसेज अमेरिका' का खिताब जीत चुकीं उनकी मॉडल कजिन उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहीं।
इसके अलावा, उनका 8 वर्षीय बेटा अबीर बावनकर, जो जन्म से 'सेरेब्रल पाल्सी' (Cerebral Palsy) की चुनौती से जूझ रहा है, उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल है। श्वेता के मुताबिक, बेटे का संघर्ष और उसके चेहरे की मुस्कान उन्हें किसी भी परिस्थिति में हार न मानने और सपनों को पूरा करने का जज्बा देती है।
सफलता का श्रेय परिवार को समर्पित
अपनी इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय श्वेता ने अपने माता-पिता, पति और बच्चों को दिया:
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माता-पिता (सुरेंद्र एवं गीता चरडे): श्वेता ने कहा कि उनके माता-पिता ने हमेशा उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को निडर होकर पूरा करने की हिम्मत दी।
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पति (अविनाश बावनकर): उन्होंने कहा, "अविनाश ने हर मोड़ पर मेरा मार्गदर्शन किया, मुझे सही दिशा दिखाई और जीवन की कूटनीति के साथ आगे बढ़ना सिखाया।"
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बच्चे (संभव एवं अबीर): श्वेता ने भावुक होते हुए कहा, "मैं अपने बच्चों के सामने एक ऐसा उदाहरण पेश करना चाहती हूँ कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि आपके इरादे पक्के हैं तो लक्ष्य तक पहुँचना असंभव नहीं है।"
कुमार
सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़