CG Paddy Procurement 2026-27: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की प्रशासनिक तैयारियां तेज, खुलेंगे 362 नए उपार्जन केंद्र; अन्नदाताओं को मिलेगी बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी सत्र 2026-27 की प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। किसानों की सुविधा के लिए राज्यभर में 362 नए उपार्जन केंद्र खोले जा रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी सत्र (2026-27) को लेकर राज्य शासन और सहकारिता विभाग ने अभी से कमर कस ली है। अन्नदाताओं को अपनी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता और समयबद्ध तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राज्यभर में धान उपार्जन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के साथ ही बड़ी संख्या में नए केंद्र खोले जाने की प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है, जिससे कृषक वर्ग में काफी सकारात्मक हलचल देखने को मिल रही है।
राज्यभर में बढ़ेंगे 362 नए धान उपार्जन केंद्र
किसानों की मांग और उनकी व्यावहारिक कठिनाइयों को गंभीरता से लेते हुए शासन स्तर पर राज्यभर में 362 नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन नए केंद्रों के अस्तित्व में आने से दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों के किसानों को अपनी उपज विक्रय के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। परिवहन लागत में कमी आने के साथ-साथ मौजूदा खरीदी केंद्रों पर लगने वाली भीड़ और अनावश्यक दबाव भी काफी हद तक कम होगा।
पारदर्शिता और सुगम व्यवस्था पर विशेष जोर
सहकारिता एवं खाद्य विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, आगामी सत्र में खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुचारू और त्रुटिरहित बनाने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है:
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डिजिटल तौल और मॉनिटरिंग: खरीदी केंद्रों पर वजन में गड़बड़ी रोकने के लिए आधुनिक एवं डिजिटल वे-ब्रिज की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
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अग्रिम बारदाना प्रबंध: धान के सुरक्षित रखरखाव और उठाव के लिए समय-पूर्व पर्याप्त बारदानों का भंडारण सुनिश्चित किया जा रहा है।
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सत्यापन कार्य में तेजी: बिचौलियों पर प्रभावी लगाम कसने के उद्देश्य से किसानों के रकबे और गिरदावरी के भौतिक सत्यापन कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
कृषि वर्ग में खुशी की लहर, समयबद्ध क्रियान्वयन की आस
प्रशासनिक स्तर पर समय से पूर्व शुरू हुई इन तैयारियों से प्रदेश के कृषक समुदाय में उत्साह का माहौल है। किसान संगठनों का मानना है कि यदि इन प्रस्तावों को धरातल पर पूरी ईमानदारी से लागू किया जाए, तो आगामी धान खरीदी सत्र इतिहास के सबसे सुगम और सफल सत्रों में से एक साबित होगा।
संबंधित जिला प्रशासनों और सहकारिता अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है कि वे मैदानी स्तर पर सभी व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग अभी से शुरू कर दें, ताकि ऐन वक्त पर किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा से बचा जा सके।
कुमार
सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़