एम्स रायपुर: 12 वर्षीय मासूम सुमना ने जाते-जाते दो जिंदगी को किया रोशन, अंगदान कर पेश की मिसाल,नम आंखों से दिया गया ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
रायपुर। कहते हैं कि इंसान भले ही इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसके नेक कर्म उसे हमेशा जिंदा रखते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है महज 12 साल की मासूम सुमना कुंडू ने। सुमना अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन दुनिया से विदा होते-होते उन्होंने दो जरूरतमंद मरीजों को नया जीवनदान दे दिया। छत्तीसगढ़ में किसी बच्चे के अंगदान का यह दूसरा ऐतिहासिक मामला है।
दुर्लभ बीमारी से जूझ रही थी सुमना
सुमना एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी 'पिक्नोडाइसोस्टोसिस' (Pycnodysostosis) से पीड़ित थीं। इस गंभीर बीमारी के पूरी दुनिया में 500 से भी कम मामले सामने आए हैं। इसमें शरीर की हड्डियां असामान्य रूप से घनी तो हो जाती हैं, लेकिन वे अंदर से बेहद कमजोर रहती हैं। साथ ही, इससे पीड़ित बच्चे के दिमाग का विकास भी सही ढंग से नहीं हो पाता।
सुमना के मस्तिष्क में दबाव बढ़ने और आंखों की नसों को नुकसान पहुंचने जैसी गंभीर जटिलताएं थीं। इससे पहले भी उनकी एक ब्रेन सर्जरी हो चुकी थी। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें 29 मई को एम्स (AIIMS) रायपुर में भर्ती कराया गया था। नौ दिनों तक आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी की जंग लड़ने के बाद, डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया।
दुख की घड़ी में माता-पिता का साहसिक फैसला
जब सुमना के माता-पिता—लक्ष्मण कुंडू और सरस्वती कुंडू—पर दुखों का पहाड़ टूटा, तब भी उन्होंने समाज के लिए एक अनुकरणीय मिसाल पेश की। प्रत्यारोपण समन्वयक अम्बे पटेल और विनीता पटेल की सही काउंसलिंग के बाद, इस बहादुर माता-पिता ने अपनी लाडली की दोनों किडनियां दान करने का साहसिक निर्णय लिया। 'स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन' (SOTTO) के दिशा-निर्देशों के तहत अंगों का आवंटन किया गया।
"बेटी को खोने का गम तो जिंदगी भर रहेगा, लेकिन इस बात का सुकून है कि उसकी वजह से दो घरों के चिराग बुझने से बच गए।"
— भावुक माता-पिता
दो मरीजों को मिला नया जीवन
सुमना की किडनियों से दो ऐसे मरीजों को नई जिंदगी मिली जो सालों से डायलिसिस के सहारे जी रहे थे:
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पहली किडनी: टाटीबंध निवासी एक 15 वर्षीय किशोर को प्रत्यारोपित की गई, जो पिछले 3 सालों से डायलिसिस पर था।
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दूसरी किडनी: रायपुर के ही एक 45 वर्षीय व्यक्ति को दी गई, जो बीते 5 वर्षों से डायलिसिस के दर्द से गुजर रहे थे।
7 घंटे चली जटिल सर्जरी, डॉक्टर रहे सफल
एम्स रायपुर के डॉक्टरों की टीम ने 7 घंटे की लंबी और बेहद जटिल सर्जरी के बाद दोनों मरीजों में किडनी का सफल प्रत्यारोपण किया। राहत की बात यह है कि दोनों मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
इस सफल और पुनीत कार्य को अंजाम देने वाली विधागवार डॉक्टरों की टीम में शामिल थे:
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यूरोलॉजी विभाग: डॉ. अमित आर. शर्मा, डॉ. दीपक बिस्वाल, डॉ. राघवेंद्र
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नेफ्रोलॉजी विभाग: डॉ. विनय राठौर, डॉ. नीलम मरावी और उनकी पूरी मेडिकल टीम।
मासूम सुमना का यह सर्वोच्च दान और उनके माता-पिता का यह फैसला समाज में अंगदान के प्रति एक नई अलख जगाएगा। सुमना भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे किसी की आंखों की उम्मीद और किसी के शरीर की धड़कन बनकर हमेशा जीवित रहेंगी।
कंचन यादव
सहसंपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज