विश्व पर्यावरण दिवस पर कोपल वाणी की अनूठी पहल: दिव्यांग बच्चों की कलाकृतियों से सजे मिट्टी के प्लांटर्स देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश
रायपुर, 5 जून (2026):विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर रायपुर की सामाजिक संस्था 'कोपल वाणी' द्वारा पर्यावरण संरक्षण और दिव्यांग बच्चों के सशक्तिकरण को जोड़ती हुई एक बेहद अनूठी और सराहनीय पहल की गई है। संस्थान के श्रवण एवं मूक-बधिर (सुनने और बोलने में अक्षम) बच्चों ने अपनी रचनात्मकता से मिट्टी के साधारण पॉट्स (गमलों) को आकर्षक छत्तीसगढ़ी लोककला और आधुनिक पेंटिंग्स से सजाकर खूबसूरत प्लांटर्स का रूप दिया है।
बुके (फूलों के गुलदस्ते) की जगह 'प्लांटर्स' देने की अपील
संस्थान का उद्देश्य समाज में एक नया बदलाव लाना है। सामान्यतः विभिन्न आयोजनों में फूलों के बुके भेंट किए जाते हैं, जो कुछ ही समय में सूखकर कचरे में फेंक दिए जाते हैं। इसके विपरीत, पौधों से सजे ये मिट्टी के प्लांटर्स लंबे समय तक घरों और कार्यालयों की शोभा बढ़ाते हैं और उस विशेष अवसर की स्मृति को जीवंत रखते हैं।
कॉरपोरेट और सामाजिक संस्थाओं ने बढ़ाया हाथ
दिव्यांग बच्चों की इस मेहनत और हुनर को सराहने के लिए राजधानी की कई प्रतिष्ठित संस्थाएं आगे आई हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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टोयोटा शोरूम (टाटीबंध शाखा)
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सहेली फाउंडेशन
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वंडर किड्स
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पीक होम्योपैथिक क्लिनिक
इन संस्थाओं ने बढ़-चढ़कर इन प्लांटर्स को खरीदा है। पर्यावरण दिवस के मौके पर ये संस्थान अपने ग्राहकों, सहयोगियों और शुभचिंतकों को यही प्लांटर्स भेंट कर प्रकृति को सहेजने का संदेश दे रहे हैं।
कलाकृतियों के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
कोपल वाणी की अध्यक्ष श्रीमती पदमा शर्मा ने बताया कि श्रवण एवं वाक् बाधित बच्चों के लिए समाज के साथ संवाद स्थापित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में जब समाज उनके बनाए उत्पादों को अपनाता है, तो बच्चों का आत्मविश्वास और मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा:
"यदि संस्थान को इसी तरह बड़े ऑर्डर्स प्राप्त होते रहें, तो इन बच्चों के लिए नियमित रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।"
इस विशेष अभियान के तहत बच्चों की मेहनत से 500 से अधिक प्लांटर्स तैयार किए गए, जिन्हें विभिन्न संस्थाओं द्वारा खरीदा जा चुका है। इन खूबसूरत कलाकृतियों को गढ़ने में दिव्य प्रकाश गुरुंग, नेहा दुबे, गोकर्ण पाटिल और वेद जैसे होनहार बच्चों ने मुख्य भूमिका निभाई है।
समाज से एक मार्मिक अपील
"डस्टबिन में जाने वाले बुके पर नहीं, दिव्यांगों के हुनर पर करें खर्च"
कोपल वाणी संस्थान ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कॉर्पोरेट जगत से अपील की है कि लोग अक्सर कार्यक्रमों में 150 से 200 रुपये तक के फूलों के बुके खरीदकर भेंट करते हैं, जो बाद में डस्टबिन में चले जाते हैं। यदि उतनी ही राशि में दिव्यांग बच्चों द्वारा निर्मित पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) प्लांटर्स खरीदे जाएं, तो एक ओर पर्यावरण सुरक्षित होगा और दूसरी ओर इन बच्चों को सम्मानजनक आजीविका मिलेगी।
संस्थान ने सभी से इस मुहिम का हिस्सा बनने का आग्रह किया है ताकि एक समावेशी और संवेदनशील समाज का निर्माण किया जा सके।
कंचन यादव
सहसंपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज