सुकमा के जंगलों से उठी बदलाव की नई गूंज: बैंक मैनेजर की नौकरी छोड़ युवाओं और आत्मसमर्पित नक्सलियों की जिंदगी संवार रहे इंजीनियर खुशाल चन्द्र
सुकमा।जहाँ आज का युवा सुरक्षित करियर और महानगरों की चकाचौंध को प्राथमिकता देता है, वहीं छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के बाराद्वार नगर के एक युवा ने मिसाल पेश की है। इंजीनियर और एमबीए (MBA) की डिग्री धारक श्री खुशाल चन्द्र केशरवानी आज सुकमा जैसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास और उम्मीद का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। वर्तमान में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) सुकमा में व्याख्याता के पद पर कार्यरत खुशाल चन्द्र, समाज के उस वर्ग को आत्मनिर्भर बना रहे हैं जिन्हें मुख्यधारा से जुड़ने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
एक्सिस बैंक के असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी छोड़ी, चुना सेवा का मार्ग
श्री खुशाल चन्द्र केशरवानी के इस सफर की सबसे खास बात यह है कि उनके पास निजी क्षेत्र में एक शानदार करियर विकल्प मौजूद था। वे पहले एक्सिस बैंक (Axis Bank) में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर ऊंचे वेतन पर कार्यरत थे। लेकिन, दिल में समाज सेवा का जज्बा लेकर उन्होंने उस आरामदायक नौकरी को अलविदा कह दिया और सुकमा के दुर्गम क्षेत्रों में रहकर लोगों को प्रशिक्षित करने का कठिन रास्ता चुना। खुशाल चन्द्र बताते हैं कि उन्हें समाज के लिए कुछ बेहतर करने की शक्ति और संस्कार अपनी माता जी से मिले हैं, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
भटके कदमों को मिल रही आत्मनिर्भरता की राह
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा संचालित आरसेटी (RSETI) और जिला जेल सुकमा के संयुक्त तत्वावधान में एक अनूठी पहल चलाई जा रही है। इसके तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों, जेल के बंदियों और स्थानीय ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं।
इन सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का कुशल संचालन और प्रतिनिधित्व स्वयं खुशाल चन्द्र केशरवानी कर रहे हैं। युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए संस्थान द्वारा निम्नलिखित व्यावहारिक कौशल सिखाए जा रहे हैं और सामग्री भी मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है:
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निर्माण व तकनीकी कार्य: राजमिस्त्री और ड्राइविंग प्रशिक्षण।
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कृषि व स्वरोजगार: मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन और मुर्गी पालन।
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लघु उद्योग: फास्ट फूड निर्माण, अगरबत्ती एवं मोमबत्ती निर्माण।
"अब हम भी सम्मान से जिएंगे" — आत्मसमर्पित नक्सली और बंदी
इस प्रशिक्षण का हिस्सा बने आत्मसमर्पित नक्सलियों और ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल उनके जीवन में एक नया सवेरा लेकर आई है। उन्होंने कहा— "हुनर सीखकर अब हम अपराध का रास्ता छोड़ सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे और समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे।" सभी प्रशिक्षणार्थी खुशाल चन्द्र के मार्गदर्शन और उनके संवेदनशील व्यवहार के लिए हृदय से आभार व्यक्त कर रहे हैं।
जेल अधीक्षक ने कहा— 'नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास'
जिला जेल सुकमा के जेल अधीक्षक श्री राजेश बिसेन ने इस संयुक्त पहल की सराहना करते हुए कहा कि, "बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से जिला जेल प्रशासन और आरसेटी मिलकर काम कर रहे हैं। श्री खुशाल चन्द्र केशरवानी के नेतृत्व में दिए जा रहे ये प्रशिक्षण बंदियों और भटके हुए युवाओं को जीवन की एक नई और सकारात्मक दिशा देने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।"
पूरे समाज के लिए बने प्रेरणास्रोत
आज खुशाल चन्द्र न केवल सक्ती जिले का नाम रोशन कर रहे हैं, बल्कि पूरे केशरवानी वैश्य समाज के लिए एक रोल मॉडल बन चुके हैं। उनके इन अनुकरणीय कार्यों की सराहना करते हुए पूरा छत्तीसगढ़ केशरवानी वैश्य समाज उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है।
यह कहानी साबित करती है कि यदि देश का शिक्षित युवा ठान ले, तो अपनी शिक्षा और कौशल के दम पर बंदूक की गूंज वाले इलाकों में भी खुशहाली और आत्मनिर्भरता के नए बीज बोए जा सकते हैं।
रिपोर्ट;कंचन यादव /नारद एक्स्प्रेस न्यूज