गौसेवा ही सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म, गाय राजनीति से नहीं बल्कि ‘सेवा की नीति’ से बचेगी: लक्ष्मी रजक

खैरागढ़।गौमाता सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की रीढ़ हैं। गाय उम्र की मोहताज नहीं होती, वह केवल हमारे भाव और श्रद्धा की हकदार है। चाहे वह एक साल की बछिया हो या 20 साल की बूढ़ी गाय, वह दूध दे या न दे, अपने हर रूप में पूजनीय है। यह विचार खैरागढ़ विधानसभा महिला शिवसेना अध्यक्ष लक्ष्मी रजक ने व्यक्त किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौमाता को किसी ‘इजाजत’ की नहीं, बल्कि ‘सम्मान’ की आवश्यकता है। कानून से पहले हमारे दिलों में उनके लिए जगह होनी चाहिए।
श्रीमती रजक ने कहा कि गौसेवा कोई शर्त नहीं बल्कि हमारे संस्कार हैं, जो किसी निश्चित समय के लिए नहीं बल्कि जीवनभर के लिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गाय राजनीति से नहीं, बल्कि नीति से बचेगी और वह नीति है— ‘सेवा करो, व्यापार नहीं’। जिस दिन देश का हर बच्चा गाय को दिल से माँ मानेगा, उस दिन गौवंश को लेकर सारे विवाद और बयान खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगे।
भ्रामक दावों का खंडन: क्या है कानूनी, धार्मिक और व्यावहारिक सच?
महिला शिवसेना अध्यक्ष ने गौवंश को लेकर समाज में फैले कुछ भ्रामक दावों पर प्रकाश डालते हुए तीन प्रमुख सच्चाईयाँ सामने रखीं:
कानूनी सच: भारत के अधिकांश राज्यों में गौवंश की हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध है। कानूनन उम्र के आधार पर गौहत्या की कोई छूट नहीं है। "14 साल की गाय की कुर्बानी की इजाजत" जैसा कोई भी नियम न तो केंद्र सरकार का है और न ही किसी राज्य सरकार का। गौहत्या रोकथाम अधिनियम के तहत हर उम्र का गौवंश सुरक्षित है।
धार्मिक सच: धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस्लाम में बकरीद के अवसर पर कुर्बानी के लिए गाय की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसके स्थान पर बकरा या भेड़ की कुर्बानी भी पूरी तरह मान्य है। अतः कुर्बानी के लिए गाय को ही आवश्यक बताना धार्मिक रूप से भी अनुचित है।
व्यावहारिक सच: भारत में पशुओं की उम्र प्रमाणित करने का कोई सरकारी सर्टिफिकेट नहीं बनता है। ऐसे में किसी पशु की उम्र 14 साल साबित करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
संरक्षण का मतलब सिर्फ नारे नहीं, धरातल पर काम: शिवसेना
लक्ष्मी रजक ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे शिवसेना परिवार के साथ मिलकर गौमाता के संरक्षण के लिए केवल नारे न लगाएं, बल्कि धरातल पर कार्य करें। उन्होंने गौ-संरक्षण और सेवा के लिए 4 मूल मंत्र साझा किए:
1 सड़क पर न छोड़ें: दूध देना बंद करने के बाद गाय को सड़क पर लावारिस छोड़ना पुण्य नहीं, बल्कि पाप है। दुधारू और बूढ़ी, दोनों ही स्थिति में गाय का अंत तक पालन-पोषण करें।
2 पहली रोटी गाय के नाम: अपनी संस्कृति का निर्वहन करते हुए रोज़ घर में बनने वाली पहली रोटी गौमाता के लिए अनिवार्य रूप से निकालें।
3 प्लास्टिक मुक्त रखें: कचरे में भोजन फेंकने की आदत बदलें। हमारे द्वारा फेंके गए प्लास्टिक को खाकर कई गायें असमय मृत्यु का शिकार हो जाती हैं।
4 गौशालाओं को सहयोग: स्थानीय गौशालाओं को गोद लें या महीने में कम से कम एक बार वहां जाकर श्रमदान और चारा दान करें।
"गौ रक्षा का अर्थ किसी से लड़ना नहीं, बल्कि खुद से गौ सेवा का संकल्प लेना है। कानून गाय की रक्षा कर सकता है, लेकिन सम्मान केवल हम नागरिक ही दे सकते हैं। जिस देश में गौमाता सुरक्षित है, वह राष्ट्र हमेशा समृद्ध और सुरक्षित रहता है।"
— लक्ष्मी रजक, महिला शिवसेना अध्यक्ष, खैरागढ़
कंचन यादव
सहसंपादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़