बिलासपुर में नशे के खिलाफ 'सर्जिकल स्ट्राइक': अफीम-गांजे की अवैध खेती पर प्रशासन का कड़ा पहरा
बिलासपुर: जिले में अवैध नशे के कारोबार की जड़ों को काटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह के सीधे निर्देश पर जिले के चप्पे-चप्पे, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है—"अवैध खेती किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
खेतों के बीच पहुँच रही जाँच टीमें
प्रशासनिक टीमें केवल मुख्य मार्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तहसीलदार, पटवारी और ग्राम सचिवों की संयुक्त टीमें खेतों के भीतर घुसकर फसलों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं।
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विशेष निगरानी: गन्ने, केले और अन्य घने पौधों की आड़ में छिपाई गई अवैध फसलों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
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दायरा: अब तक जिले के लगभग 60 से 70 प्रतिशत संवेदनशील इलाकों की जांच पूरी की जा चुकी है।
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फॉर्म हाउस रडार पर: संदिग्ध गतिविधियों की आशंका के चलते निजी फॉर्म हाउसों की भी सघन तलाशी ली जा रही है।
संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष फोकस
नशे के विरुद्ध इस अभियान में कुछ क्षेत्रों को 'हॉटस्पॉट' के रूप में चिह्नित कर वहां निगरानी और सूचना तंत्र को और भी मजबूत किया गया है:
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कोटा
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बेलगहना
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सीपत
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मस्तूरी
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी: लापरवाही पर होगी FIR
कलेक्टर ने इस अभियान में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी भी क्षेत्र में प्रतिबंधित खेती पाई जाती है, तो:
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संबंधित पटवारी और ग्राम सचिव सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।
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जानकारी छिपाने या कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने की चेतावनी दी गई है।
प्रशासन की अपील: नशे के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके संज्ञान में ऐसी कोई भी संदिग्ध गतिविधि आती है, तो तुरंत पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित करें।
मयंक श्रीवास्तव
मुख्य संपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज