छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में टेंडर विवाद: एक ही मालिक की दो कंपनियों के चयन पर खड़े हुए सवाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग और विवादों का पुराना नाता रहा है। ताजा मामला छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) द्वारा प्रदेश के 8 जोनों के लिए निकाले गए मैनपावर सप्लाई के टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर की शर्तों का उल्लंघन करते हुए एक ही रसूखदार मालिक से जुड़ी दो अलग-अलग कंपनियों का चयन कर लिया गया है।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
टेंडर प्रक्रिया की स्पष्ट शर्त थी कि एक ही मालिक की दो कंपनियां इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकतीं। इसके लिए सभी निविदाकारों से लिखित शपथ पत्र भी लिया गया था कि उनकी कोई दूसरी संबद्ध कंपनी इसमें शामिल नहीं है।
25 मार्च को चयनित 8 कंपनियों की सूची जारी होने के बाद यह खुलासा हुआ कि:
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एसआईएस कैश सर्विसेस लिमिटेड (SIS Cash Services Ltd)
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डस्टर टोटल सॉल्युशन सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड (Duster Total Solution Services Pvt Ltd)
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ये दोनों ही कंपनियां भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रितुराज किशोर सिन्हा से संबंधित हैं। इस खुलासे के बाद विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
कड़ी शर्तों और टर्नओवर पर भी आपत्ति
इस 300 करोड़ रुपये के विशाल टेंडर की शर्तें शुरुआत से ही संदेह के घेरे में थीं। जानकारों का कहना है कि टेंडर को खास कंपनियों के पक्ष में मोड़ने के लिए कुछ विशेष प्रावधान किए गए थे:
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टर्नओवर: 300 करोड़ के काम के लिए ठीक उतना ही (300 करोड़) का टर्नओवर मांगा गया।
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अनुभव की कमी: चौंकाने वाली बात यह रही कि समान प्रकृति के कार्य का कोई पिछला अनुभव नहीं मांगा गया।
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Place-Holder Clause: केवल 3 साल पुरानी प्लेसमेंट कंपनियों को भी मौका देने की छूट दी गई, जिससे अनुभवी कंपनियां पीछे छूट गईं।
कुल 148 दावेदार, 8 का हुआ चयन
इस मैनपावर सप्लाई के लिए कुल 148 कंपनियों ने दौड़ लगाई थी। तकनीकी और प्राइज बिड के बाद अंतिम रूप से 8 कंपनियों का चयन किया गया, जिनमें बॉम्बे इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी, इनोविज़न लिमिटेड, पैरेग्रीन गार्डनिंग और विवादित दो कंपनियों समेत अन्य नाम शामिल हैं।
अधिकारी का पक्ष: "हमें तीन कंपनियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। जिनमें से दो कंपनियां एक ही संस्था की बताई जा रही हैं, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा एक डिबार कंपनी ने कोर्ट से स्टे लिया है, उनका भी जवाब लिया जा रहा है। जवाब मिलने के बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।" — देवेन्द्र भारद्वाज, विशेष सचिव, आबकारी विभाग
मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक पहुंची शिकायत
शराब घोटाले की जांच के बाद से आबकारी विभाग में मैनपावर सप्लाई का काम बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। इस बार टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की शिकायत न केवल राज्य के मुख्यमंत्री से की गई है, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक भी मामला पहुंच चुका है।
कंचन यादव
सहसंपादक/नारद एक्स्प्रेस न्यूज