आईपीएल सट्टा: रसूखदार आरोपी के लिए सक्ती पुलिस के बदले सुर! महामंत्री की गिरफ्तारी छिपाई, अदालत ने जेल भेजा

आईपीएल सट्टा: रसूखदार आरोपी के लिए सक्ती पुलिस के बदले सुर! महामंत्री की गिरफ्तारी छिपाई, अदालत ने जेल भेजा

सक्ती: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में आईपीएल सट्टे के खिलाफ चल रही पुलिसिया कार्रवाई अब चर्चाओं और विवादों के केंद्र में है। इसी मामले में गिरफ्तार किए गए भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री चिराग केसरवानी की जमानत याचिका को सीजेएम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जहाँ एक ओर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की 'गोपनीय' कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता के बीच कड़े सवाल उठ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

29 अप्रैल को सक्ती पुलिस को पेट्रोलिंग के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि भूपेंद्र राठौर नामक व्यक्ति मोबाइल के जरिए आईपीएल मैचों में सट्टे का अवैध कारोबार कर रहा है। पुलिस ने भूपेंद्र को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो व्हाट्सएप चैट और डिजिटल लेन-देन के माध्यम से एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ।

इस जांच की कड़ी में अब तक कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है:

  1. भूपेंद्र राठौर

  2. मुकेश अग्रवाल

  3. चंद्रेश राठौर

  4. पिंटू जायसवाल

  5. संजू केंवट

  6. चिराग केसरवानी (युवा मोर्चा जिला महामंत्री, शिवरीनारायण)

कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत?

सहायक जिला अभियोजन अधिकारी अरविंद कुमार जायसवाल के अनुसार, चिराग केसरवानी को 3 मई को गिरफ्तार कर 4 मई को कोर्ट में पेश किया गया था। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी जुआ एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं। आदतन अपराधी होने के आधार पर कोर्ट ने जमानत आवेदन को निरस्त करते हुए उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।


पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल: आखिर 'चिराग' के लिए नियम क्यों बदले?

इस पूरे घटनाक्रम में सक्ती पुलिस की कार्यशैली संदेह के घेरे में है। जिले के एसपी प्रफुल्ल ठाकुर और सक्ती थाना प्रभारी लखन पटेल के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई पर भेदभाव के आरोप लग रहे हैं:

  • भेदभावपूर्ण रवैया: जब शुरुआती 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, तो पुलिस ने बकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी की और आरोपियों की फोटो भी सार्वजनिक की। लेकिन छठे आरोपी (सत्ताधारी दल के नेता) चिराग केसरवानी की गिरफ्तारी को पूरी तरह गोपनीय रखा गया।

  • प्रचार में कमी: स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस 7-8 लीटर अवैध शराब पकड़े जाने पर भी ग्रुप में विज्ञप्ति डालती है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मामले में चुप्पी साध ली गई।

  • जनता का अविश्वास: आरोपी का फोटो सार्वजनिक न करने और कार्रवाई को दबाने की कोशिश से पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि अपराधी चाहे कोई भी हो, पुलिस के लिए नियम समान होने चाहिए।

निष्कर्ष: सट्टे के इस बड़े नेटवर्क में राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों की संलिप्तता और पुलिस की कथित 'नरमी' ने प्रशासन की छवि पर दाग लगाया है। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है, लेकिन सक्ती पुलिस को अपनी कार्यशैली पर उठ रहे सवालों का जवाब देना भारी पड़ सकता है।

कंचन यादव

सहसंपादक /नारद एक्स्प्रेस न्यूज