कांकेर: मतांतरण के विवाद में थमी अंतिम विदाई, 5 दिन से फ्रीजर में शव
कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंडरीपारा (अमोड़ी) में एक ईसाई मतांतरित महिला, शामबाई मंडावी (39) की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार को लेकर गतिरोध पैदा हो गया है। ग्रामीणों और पारंपरिक समाज के कड़े विरोध के चलते शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया है।
विवाद की मुख्य वजहें
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रूढ़ि जन्य परंपरा: ग्रामीणों का तर्क है कि मतांतरित परिवार ने स्थानीय देवी-देवता व्यवस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों को छोड़ दिया है, इसलिए उन्हें गांव की जमीन पर अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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गायता की अनुमति का अभाव: बस्तर की परंपरा के अनुसार, गांव के 'गायता' (धार्मिक प्रमुख) ही अंतिम संस्कार के लिए जमीन का चयन करते हैं, जो इस मामले में अनुमति देने को तैयार नहीं हैं।
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कानून व्यवस्था की चुनौती: 23 फरवरी को जब परिजन शव लेकर गांव पहुंचे, तो विरोध इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप कर शव वापस लाना पड़ा।
प्रशासनिक लाचारी और परिवार की गुहार
महिला के पति कमलेश मंडावी ने अपनी पत्नी के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए दो बार कलेक्टर और एसपी से गुहार लगाई है। हालांकि, प्रशासन अब तक ग्रामीणों को मनाने में सफल नहीं हो सका है।
| विवरण | स्थिति |
| मृत्यु की तिथि | 23 फरवरी |
| शव की स्थिति | सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के फ्रीजर में बंद |
| प्रशासनिक रुख | कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर और पुलिस बल समाधान की कोशिश में जुटे |
| पिछला रिकॉर्ड | पूर्व में खुटगांव और दुर्गूकोंदल के शवों का अंतिम संस्कार धमतरी और भानुप्रतापपुर में करना पड़ा था |
गंभीर चिंता: बस्तर और कांकेर के वनांचलों में मतांतरण और मूल परंपराओं के बीच का यह टकराव अब शवों के अपमान तक पहुँच गया है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह संवैधानिक अधिकारों और स्थानीय रूढ़िवादी परंपराओं के बीच संतुलन कैसे बनाए।
मयंक श्रीवास्तव
चीफ एडिटर/नारद एक्स्प्रेस