आरएसएस की 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' का महामंथन: शताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और सामाजिक रूपांतरण पर केंद्रित ऐतिहासिक बैठक
आरएसएस अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2026: शताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और 'पंच परिवर्तन' का रोडमैप। बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा और वैश्विक शांति पर संघ का रुख। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
समालखा (हरियाणा) | 14 मार्च 2026 हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा स्थित 'माधव सृष्टि' परिसर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा आज अपने दूसरे दिन में प्रवेश कर चुकी है। यह तीन दिवसीय बैठक संगठन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि संघ इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष (शताब्दी वर्ष) पूरे कर रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के कुशल नेतृत्व में, देश भर से एकत्रित 1,487 प्रतिनिधियों का यह समागम संगठन के आगामी भविष्य और राष्ट्र निर्माण की नई रणनीतियों को आकार दे रहा है।
शताब्दी वर्ष का विजन: शाखा विस्तार और व्यापक जन-संपर्क प्रतिनिधि सभा के दौरान सह-सरकार्यवाह सी. आर. मुकुंद ने वार्षिक प्रतिवेदन (2025-26) प्रस्तुत करते हुए संगठन के अभूतपूर्व विस्तार के आंकड़े साझा किए। संघ की कार्यपद्धति में आ रहे बदलाव और उसकी पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में शाखाओं की संख्या 83,129 से बढ़कर 88,949 तक पहुंच गई है।
शताब्दी वर्ष के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए संघ ने दो आयामी रणनीति अपनाई है:
- सांगठनिक सुदृढ़ीकरण: शाखाओं की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ उन भौगोलिक क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाना, जहाँ संघ का प्रभाव अभी सीमित था।
- व्यापक जन-संपर्क अभियान: संघ केवल अपने पारंपरिक दायरे तक सीमित न रहकर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच रहा है। केवल छह महीने के 'गृह संपर्क अभियान' के अंतर्गत 10.40 करोड़ घरों और 3.90 लाख गांवों का स्पर्श किया गया है। केरल जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी संघ ने 55,000 मुस्लिम और 54,000 ईसाई परिवारों से संवाद स्थापित कर सामाजिक सद्भाव की एक नई मिसाल पेश की है।
'पंच परिवर्तन' का रोडमैप बैठक का मुख्य केंद्र 'पंच परिवर्तन' का आह्वान है, जिसे संघ एक सामाजिक जागरण के रूप में देख रहा है:
- सामाजिक समरसता: जाति और वर्ग भेद को मिटाकर 'हिंदू समाज की एकात्मता' को सुदृढ़ करना।
- कुटुंब प्रबोधन: बढ़ते पाश्चात्य प्रभाव और टूटते पारिवारिक मूल्यों के दौर में, भारतीय संयुक्त परिवार प्रणाली की सुरक्षा।
- पर्यावरण संरक्षण: जलवायु परिवर्तन की वैश्विक आपदा के समाधान हेतु प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना।
- स्व व स्वदेशी का आग्रह: भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रति गर्व का भाव जागृत करना।
- नागरिक कर्तव्य: एक अनुशासित समाज के निर्माण हेतु संवैधानिक मूल्यों और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजगता।
राष्ट्रीय और वैश्विक मुद्दों पर संघ का रुख प्रतिनिधि सभा ने वर्तमान में देश और दुनिया के समक्ष मौजूद ज्वलंत मुद्दों पर भी गंभीरता से मंथन किया है:
- बांग्लादेश की स्थिति: संघ ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हो रहे सुनियोजित अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र (UN) से अपील की है कि वे इस मानवीय संकट पर मूकदर्शक न बनें और बांग्लादेश सरकार पर दबाव बनाएं ताकि वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- वैश्विक शांति: पश्चिम एशिया (इजरायल-ईरान-अमेरिका) में जारी युद्ध और तनाव पर संघ ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि युद्ध मानवता के लिए विनाशकारी है। भारत की विदेश नीति के अनुरूप संघ ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति स्थापना की वकालत की है।
- आंतरिक चुनौतियां: बैठक में धर्मांतरण, जनसंख्या असंतुलन, मादक पदार्थों की लत और महिलाओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर चिंता जताई गई है। संघ ने इन सामाजिक व्याधियों के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर काम कर रहे धार्मिक नेताओं, प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया है।
बैठक का महत्व और समापन यह बैठक न केवल पिछले वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा है, बल्कि आगामी वर्षों में भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य में संघ की भूमिका को तय करने का एक 'ब्लूप्रिंट' भी है। 37,048 हिंदू सम्मेलनों के माध्यम से 3.5 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाने के बाद, संघ अब अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को अगले स्तर पर ले जाने की योजना बना रहा है।
15 मार्च को बैठक के अंतिम दिन, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी देंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि शताब्दी वर्ष में संघ का यह 'नई दिशा' का संकल्प भारतीय राजनीति और समाज पर किस तरह का गहरा प्रभाव डालता है।
कंचन यादव
सह सम्पादक / नारद एक्सप्रेस न्यूज़