महादेव ऐप पर बड़ी स्ट्राइक, रायपुर-भिलाई में रेड और 'दुबई कनेक्शन' का खुलासा

"छत्तीसगढ़ महादेव सट्टा ऐप केस अपडेट: रायपुर और भिलाई में 4 ठिकानों पर छापेमारी। दुबई कनेक्शन वाले पैनल ऑपरेटर्स गिरफ्तार, करोड़ों के बैंक खाते फ्रीज। जानें कैसे चल रहा था सट्टे का यह अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट और क्या है ताजा कार्रवाई।"

महादेव ऐप पर बड़ी स्ट्राइक, रायपुर-भिलाई में रेड और 'दुबई कनेक्शन' का खुलासा

रायपुर/भिलाई | 19 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने आज संयुक्त रूप से महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) के खिलाफ अब तक की सबसे संगठित कार्रवाई की है। राजधानी रायपुर और इस्पात नगरी भिलाई के 4 वीआईपी ठिकानों पर की गई इस छापेमारी ने यह साफ कर दिया है कि खाड़ी देशों से संचालित हो रहा यह काला साम्राज्य अभी भी स्थानीय स्तर पर अपनी जड़ें जमाए हुए है।

  1. कैसे खुला 'पैनल ऑपरेटर्स' का राज? आज की रेड में गिरफ्तार किए गए पैनल ऑपरेटर्स दरअसल इस अवैध कारोबार के 'फील्ड ऑफिसर' थे। जांच में पाया गया कि:
  • ये ऑपरेटर्स भिलाई के 'आकाश गंगा' जैसे व्यस्त व्यापारिक इलाकों और रायपुर के लग्जरी अपार्टमेंट्स से अपना नेटवर्क चला रहे थे।
  • ये लोग 15 लाख से 25 लाख में दुबई के आकाओं (सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल) से एक 'पैनल' (आईडी) खरीदते थे।
  • एक-एक पैनल के जरिए हर महीने करोड़ों रुपये का दांव लगवाया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों के पास से दर्जनों मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेशनल सिम कार्ड बरामद हुए हैं।
  1. 'म्यूल अकाउंट्स' का मकड़जाल: करोड़ों फ्रीज पुलिस ने आज कार्रवाई के दौरान 500 से अधिक बैंक खातों की पहचान की है, जिन्हें तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है।
  • ये खाते अक्सर गरीब मजदूरों या छात्रों के केवाईसी (KYC) दस्तावेजों का दुरुपयोग कर खोले गए थे।
  • इन खातों का उपयोग सट्टे की राशि को 'लेयरिंग' (Layering) के जरिए दुबई भेजने के लिए किया जाता था।
  • हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अब तक इस पूरे घोटाले में करीब 2,621 करोड़ की संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा चुकी है।
  1. दुबई कनेक्शन: रिमोट कंट्रोल से चल रहा खेल जांच एजेंसियों (ED और CBI) के मुताबिक, महादेव ऐप का मुख्यालय दुबई में है।
  • सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल: ये दोनों भिलाई के ही रहने वाले हैं, जो अब दुबई से एक ग्लोबल सट्टा साम्राज्य चला रहे हैं।
  • हवाला और क्रिप्टो: सट्टे से कमाया गया पैसा हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भारत से बाहर भेजा जाता है, और फिर उसे 'विदेशी पोर्टफोलियो निवेश' (FPI) के रूप में वापस भारतीय शेयर बाजार में सफेद करके लगाया जाता है।

कंचन यादव

सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़