जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी दोषी करार, हाईकोर्ट ने दिया सरेंडर करने का आदेश
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति को झकझोर देने वाले 21 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र और जेसीसीजे (JCCJ) सुप्रीमो अमित जोगी को दोषी करार देते हुए उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (Surrender) करने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख घटनाक्रम: एक नजर में
• हत्या की तारीख: 4 जून 2003
• पीड़ित: राम अवतार जग्गी (एनसीपी नेता और विद्याचरण शुक्ल के करीबी)
• कुल आरोपी: 31 (2 सरकारी गवाह बने, 28 को पहले ही सजा मिल चुकी थी)
• ताजा फैसला: निचली अदालत से मिले 'क्लीन चिट' को हाईकोर्ट ने रद्द किया।
क्या था पूरा मामला?
जून 2003 में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी की सरकार थी। इस मामले में कुल 31 अभियुक्त बनाए गए थे। साल 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।
निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने कानूनी लड़ाई जारी रखी और मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट से होता हुआ वापस हाईकोर्ट पहुंचा, जहां आज अमित जोगी को भी दोषी ठहराया गया।
अमित जोगी की प्रतिक्रिया: "मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ"
कोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी निराशा व्यक्त की है। उनके बयान के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
"मुझे बिना सुनवाई का अवसर दिए मात्र 40 मिनट में दोषी करार दे दिया गया। जिस व्यक्ति को पहले दोषमुक्त किया गया था, उसके साथ ऐसा व्यवहार पहली बार हुआ है। मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है और मैं इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाऊंगा। सत्य की जीत अवश्य होगी।"
राजनीतिक गलियारों में हलचल
राम अवतार जग्गी तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद विश्वसनीय माने जाते थे। उनकी हत्या ने उस दौर में छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया था। अब 21 साल बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि क्या अमित जोगी को वहां से कोई राहत मिलती है या उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
मयंक श्रीवास्तव
चीफ एडिटर