जनगणना 2026: एक डिजिटल और सामाजिक क्रांति

जनगणना 2026: एक डिजिटल और सामाजिक क्रांति

अभियान का शंखनाद और डिजिटल नवाचार

भारत की स्वतंत्रता के बाद यह 8वीं जनगणना है, जिसे पूरी तरह से 'डिजिटल' रूप दिया गया है।

  • पेपरलेस प्रक्रिया: इस बार डेटा जुटाने के लिए कागजी फॉर्म का उपयोग नहीं होगा। लगभग 31 से 34 लाख प्रगणक (Enumerators) मोबाइल ऐप के जरिए सीधे जानकारी दर्ज करेंगे।

  • स्व-गणना (Self-Enumeration): इतिहास में पहली बार नागरिकों को यह सुविधा दी गई है कि वे स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण भर सकें। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने खुद इस प्रक्रिया में हिस्सा लेकर इसकी शुरुआत की है।

 जातिगत गणना: एक सदी बाद वापसी

इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जातिगत डेटा (Caste Enumeration) का संग्रह है।

  • 95 साल का अंतराल: 1931 के बाद यह पहली बार है जब अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य जातियों और उप-जातियों की भी गणना की जा रही है।

  • उद्देश्य: सरकार का तर्क है कि इससे पिछड़े वर्गों की सटीक जनसंख्या का पता चलेगा, जिससे आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।

दो चरणों में बँटा महा-अभियान

यह पूरी प्रक्रिया दो प्रमुख चरणों में संपन्न होगी:

  • प्रथम चरण (अप्रैल - सितंबर 2026): इसे 'मकान सूचीकरण और आवास जनगणना' (Houselisting and Housing Census) कहा जाता है। इसमें घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (बिजली, पानी, शौचालय) और संपत्तियों का विवरण लिया जाएगा। दिल्ली सहित कई राज्यों में जमीनी काम 16 अप्रैल से शुरू होगा।

  • द्वितीय चरण (फरवरी 2027): इस मुख्य चरण में 'जनसंख्या गणना' की जाएगी। इसमें शिक्षा, धर्म, प्रवासन, प्रजनन क्षमता और जाति से जुड़े व्यक्तिगत सवाल पूछे जाएंगे।

सामाजिक दायरे का विस्तार

इस बार की जनगणना बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को भी स्वीकार कर रही है:

  • लिव-इन कपल्स: स्थिर लिव-इन जोड़ों को जनगणना के उद्देश्यों के लिए शादीशुदा माना जाएगा।

  • दिव्यांगता: दिव्यांगों की सभी 21 श्रेणियों को रिकॉर्ड किया जाएगा ताकि उनके लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके।

भविष्य पर प्रभाव (परिसीमन और महिला आरक्षण)

यह जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि देश की राजनीति की दिशा तय करेगी:

  • परिसीमन (Delimitation): इस डेटा के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होगा।

  • महिला आरक्षण: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया भी इसी जनगणना के परिणामों पर टिकी है।


निष्कर्ष: लगभग 11,718 करोड़ रुपये के बजट वाला यह अभियान भारत के अगले 10-15 वर्षों के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करेगा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए किया जाएगा।

कंचन यादव 

सह-संपादक