छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर 'मास्टरस्ट्रोक'! साय कैबिनेट ने 'स्वतंत्रता विधेयक 2026' को दी हरी झंडी
'धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026': छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के खिलाफ नया कानूनी हथियार तैयार छत्तीसगढ़ में अब नहीं चलेगा 'धर्मांतरण का खेल': कैबिनेट ने दी नए सख्त कानून को मंजूरी
रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है! मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026' (Chhattisgarh Freedom of Religion Bill 2026) के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई है। यह कानून अब विधानसभा में पेश किया जाएगा, जिससे प्रदेश में जबरन धर्मांतरण कराने वाले गिरोहों की नींद उड़ना तय है।
खबर के 5 बड़े 'धमाकेदार' पॉइंट्स:
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जेल और भारी जुर्माना: नए कानून के तहत बल, प्रलोभन, या धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर 7 से 20 साल तक की जेल और लाखों रुपये का जुर्माना लगेगा।
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'चंगाई सभाओं' पर लगाम: उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह कानून विशेष रूप से 'चंगाई सभाओं' (Faith Healing) जैसी संदिग्ध गतिविधियों को निशाना बनाएगा।
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60 दिन पहले सूचना अनिवार्य: स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने के लिए अब जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
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अजमानतीय और संज्ञेय अपराध: इस कानून के तहत दर्ज होने वाले मामले 'अजमानतीय' (Non-bailable) होंगे, यानी आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलेगी।
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विपक्ष बनाम सत्ता: बजट सत्र में यह विधेयक सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है, जहाँ इसे आदिवासियों की संस्कृति और धार्मिक स्वतंत्रता की 'सबसे बड़ी ढाल' बताया जा रहा है।
सरकार का रुख: "राज्य में शांति और सामाजिक समरसता को किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। अवैध धर्मांतरण पर यह कानून एक निर्णायक प्रहार होगा।" — सूत्रों के अनुसार सरकार का स्पष्ट संदेश।
सह सम्पादक , कंचन यादव
नारद एक्सप्रेस न्यूज़