सावधान! UPI 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' और 'QR कोड' बदलकर मिनटों में साफ हो रहे हैं खाते, जानें ठगों का नया पैंतरा

देश में UPI 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' और 'QR कोड स्वैपिंग' के जरिए साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। जानें ठगों का यह नया पैंतरा और खुद को सुरक्षित रखने के तरीके।

सावधान! UPI 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' और 'QR कोड' बदलकर मिनटों में साफ हो रहे हैं खाते, जानें ठगों का नया पैंतरा

डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां चाय की टपरी से लेकर बड़े-बड़े मॉल तक UPI पेमेंट (Unified Payments Interface) हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, वहीं साइबर ठगों ने भी लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए इसी UPI को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में होने वाले कुल साइबर अपराधों में से लगभग 70% मामले डिजिटल पेमेंट और UPI फ्रॉड से जुड़े हैं। इस समय ठग मुख्य रूप से दो तरीकों—'कलेक्ट रिक्वेस्ट' (Collect Request) और 'QR कोड स्वैपिंग' (QR Code Swapping) का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। आइए समझते हैं कि यह खेल कैसे चल रहा है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।

1. UPI 'कलेक्ट रिक्वेस्ट' स्कैम: पैसे पाने के चक्कर में गंवा रहे हैं रकम

यह फ्रॉड ज्यादातर उन लोगों के साथ हो रहा है जो OLX, फेसबुक मार्केटप्लेस जैसी वेबसाइट्स पर सामान बेचते हैं या नौकरी और किराये के घर की तलाश कर रहे हैं।

ठगी का तरीका:

  • पहला कदम: ठग खरीदार या मकान मालिक बनकर आपसे संपर्क करता है और सौदा पक्का कर लेता है।

  • दूसरा कदम: वह कहता है, "सर, मैं आपको एडवांस पैसे भेज रहा हूँ, आप अपना Google Pay या PhonePe चेक कीजिए।"

  • तीसरा कदम: ठग आपको पैसे भेजने के बजाय आपके UPI ऐप पर 'Collect Money' (पैसे मांगना) या 'Pay' की रिक्वेस्ट भेजता है।

  • धोखा: लोग जल्दबाजी में सोचते हैं कि 'Pay' या 'UPI PIN' डालने से पैसे उनके खाते में आएंगे। लेकिन जैसे ही वे अपना सीक्रेट पिन (PIN) दर्ज करते हैं, पैसे आने के बजाय उनके खाते से कटकर ठग के पास चले जाते हैं।

याद रखें: पैसे प्राप्त करने (Receive) के लिए कभी भी UPI PIN डालने की आवश्यकता नहीं होती। PIN का इस्तेमाल सिर्फ पैसे भेजने (Send) के लिए किया जाता है।

2. क्यूआर कोड स्वैपिंग (QR Code Swapping): दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को चपत

यह ठगी का एक बेहद शातिर और नया ऑफलाइन तरीका है, जिसने व्यापारियों और ग्राहकों दोनों की नींद उड़ा रखी है।

ठगी का तरीका:

  • खेल कैसे होता है: ठग भीड़-भाड़ वाले बाजारों, पेट्रोल पंपों, रेस्टोरेंट या किराना दुकानों को निशाना बनाते हैं।

  • QR बदलना: जब दुकानदार का ध्यान भटकता है, तो ठग काउंटर पर लगे असली QR कोड के स्टिकर के ऊपर हूबहू दिखने वाला अपना नकली QR कोड स्टिकर चिपका देते हैं।

  • नुकसान: जब ग्राहक सामान खरीदकर उस QR कोड को स्कैन करता है, तो पैसा दुकानदार के खाते में जाने के बजाय सीधे ठग के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। दुकानदार को लगता है कि ग्राहक ने पैसे नहीं दिए, जबकि ग्राहक के खाते से पैसे कट चुके होते हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: इन 4 बातों का रखें खास ख्याल

अगर आप ऑनलाइन लेन-देन करते हैं, तो खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन नियमों को गांठ बांध लें:

  • पिन (PIN) का नियम: अगर कोई कह रहा है कि पैसे लेने के लिए PIN डालो या 'Pay' पर क्लिक करो, तो तुरंत समझ जाएं कि वह फ्रॉड है।

  • नाम क्रॉस-चेक करें: किसी भी QR कोड को स्कैन करने के बाद, पेमेंट की पुष्टि करने से पहले स्क्रीन पर आने वाले नाम को दुकानदार से जरूर री-वेरिफाई करें।

  • साउंड बॉक्स और अलर्ट: दुकानदारों को सलाह दी जाती है कि वे वॉयस अलर्ट (Sound Box) या एसएमएस नोटिफिकेशन चालू रखें ताकि पेमेंट मिलते ही तुरंत पुष्टि हो सके। अपने QR कोड स्टिकर को समय-समय पर चेक करते रहें।

  • अपरिचित लिंक्स से बचें: व्हाट्सएप या एसएमएस पर आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करके UPI पेमेंट पेज पर न जाएं।

अगर आपके साथ फ्रॉड हो जाए, तो तुरंत क्या करें?

यदि आप किसी ऐसे फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं, तो पहले 2 घंटे (Golden Hours) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं:

1.हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें:समय सबसे कीमती है.

बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी आप शिकायत करेंगे, बैंक द्वारा ठग के खाते को फ्रीज करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।

2.बैंक को सूचित करें:कार्ड और नेट बैंकिंग सुरक्षित करें.

अपने बैंक के कस्टमर केयर पर बात करके संबंधित ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट करें और सुरक्षा के लिए अपने डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग को तुरंत ब्लॉक करवाएं।

3.आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें:लिखित रिकॉर्ड जरूरी है.

भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर फ्रॉड के स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी और डिटेल्स के साथ अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराएं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल जन-जागरूकता और शिक्षा के उद्देश्य से साझा की गई है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय या पेशेवर सलाह नहीं है। डिजिटल लेन-देन करते समय हमेशा पूरी सावधानी बरतें। साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए सरकारी दिशा-निर्देशों और अपने बैंक द्वारा जारी सुरक्षा नियमों का पालन करें। किसी भी नुकसान के लिए लेखक/प्रकाशन जिम्मेदार नहीं होगा।

कंचन यादव 

सह सम्पादक/नारद एक्सप्रेस न्यूज़