खाद संकट, नई कृषि नीतियों और किसानों पर बढ़ता आर्थिक बोझ, चिंतनीय है आम आदमी पार्टी

रायपुर . आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ ट्द्वारा प्रदेश के किसानों से जुड़े गंभीर और ज्वलंत मुद्दों को लेकर राजधानी रायपुर में महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी। प्रेस कॉन्फ्रेस में आप नेताओं ने कहा कि यह गंभीर विषय है की प्रदेशभर में उभर रहे खाद संकट, रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता में कमी, नई पंजीयन व्यवस्था, नैनो खाद की अनिवार्यता तथा किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव चिंतनीय है। प्रदेश के किसान खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे हुए हैं. लेकिन इस बौध खाद वितरण व्यवस्था में किए गए बदलावों ने किसानों की परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं। किसानों को अब खाद लेने के लिए पंजीयन, टोक्न और राजस्व कार्यालयों की प्रक्रियाओं में उलझाया जा रहा है। कई सहकारी समितियों में डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक उर्वरकों की कमी की शिकायतै लगातार सामने आ रही हैं। छतीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को अभी तक समितियों के माध्यम से खाद उपलब्ध नहीं करा पौना सरकार की विफलता है और किसान विरोधी मानसिकता को प्रदर्शित कर रही है।
राज्य सरकार द्वारा किसानों को कम से कम खाद मिले इसके लिए भारी षड्यंत्र किया जा रहा है। एक तरफ 60:40 की अनुपात को बदलकर 70:30 का अनुपात करना यानि कि उर्वरक 30% और नगद राशि 70% समितियों से किसानौ को मिलेगी जबकि पूर्व में 60% नगद राशि और 40% उर्वरक मिलती थी इस प्रकार समितियों से 10% कम खाद प्राप्त होगी और बाकी के लिए निजी खाद व्यापारियों से अधिक दाम पर खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा। अब प्रति एकड़ एक एक बोरी यूरिया, डीएपी से फसल उत्पादन पर गंभीर रूप से कमी आएगी। प्रदेश के अनेक किसान संगठनों और कृषि विशेषज्ञों ने भी बिना पर्याप्त तैयारी के रासायनिक खाद के उपयोग को कम करने की सलाह को अव्यावहारिक बताया है। उनका मानना है कि वर्षों तक सरकारों ने किसानों को अधिक उत्पादन के नाम पर रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया, लेकिन अब अचानक जैविक खेती की ओर बढ़ने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि जमीन, संसाधन और खाद की उपलब्धता की स्थिति इसके अनुकूल नहीं है। यदि रासायनिक खाद की मात्रा घटाई जाती है तो उत्पादन प्रभावित होगा, खेती की लागत बढ़ेगी और किसान आर्थिक संकट में फंस जाएंगे। छोटे और सीमांत किसान पहले से ही कर्ज, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में खाद की कटौती और जटिल वितरण प्रणाली किसानों को और अधिक परेशानी में डाल सकती है। इन्हीं मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी ने केन्द्र और राज्य सरकार दोनों से जवाब मांगा है। पार्टी किसानों की आवाज को मजबूती से उठाते हुए कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था तैयार किए किसानों पर नई नीतियों का बोझ क्यों डाला जा रहा है। यदि सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहती है तो किसानों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, प्रोत्साहन राशि और वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
आम आदमी पार्टी की प्रमुख मांगे :
1. किसानों को समय पर डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
2. खाद वितरण में लागू नई पंजीयन एवं टोकन व्यवस्था समाप्त की जाये।
3. प्रति एकड़ खाद की मात्रा में की गई कटौती वापिस लिया जाये।
4. नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार हो।
5. जैविक खेती लागू करने से पहले किसानों के लिए विशेष आर्थिक सहायता पैकेज दिया जाये।
6. किसानों पर बढ़ते कर्ज और उत्पादन घटने की आशंका पर सरकार की जवाबदेही तय हो।
7. सहकारी समितियों में खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सरल बनाया जाये।
आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि पिछले साल भी सरकार की किसानों के प्रति अनदेखी से किसान वर्ग परेशान रहा और यदि इस साल भी सरकार किसानों के मुद्दों को अनदेखा करती है तो पार्टी प्रदेश के किसानों, किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य की भाजपा सरकार की होगी।
सह संपादक, कंचन यादव
नारद एक्सप्रेस न्यूज